एक फिल्म के बाद कभी नहीं किया O.P. Nayyar ने लता मंगेशकर के साथ काम — क्यों हो गया विवाद?

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ओंकार प्रसाद “O.P.” नैयर का नाम हिंदी म्यूजिक इंडस्ट्री के उन संगीतकारों में आता है, जिन्होंने संगीत के बिना औपचारिक प्रशिक्षण के भी खूब नाम और मुकाम हासिल किया। 1952 में उनके डायरेक्टार के रूप में आने वाली पहली फिल्म ‘आसमान’ (Aasmaan) में लता मंगेशकर को गाने के लिए बुलाया गया था। लेकिन रिकॉर्डिंग के समय लता जी समय पर नहीं पहुंचीं, और खुद ने बाद में स्वास्थ्य संबंधी कारण बताकर शामिल न होने की वजह बताई। तब नैयर ने साफ कहा कि “जो समय का सम्मान नहीं करता, उसका मेरे लिए कोई महत्व नहीं है।” लता जी ने भी जवाब दिया कि “जो संवेदनहीन है, मैं उसके गाने नहीं गा सकती।” इस छोटी लेकिन अहम घटना ने दोनों के बीच दूरियां पैदा कर दीं, और इसके बाद उन्होंने कभी एक साथ काम नहीं किया। अन्त में उस गाने को राजकुमारी ने गाया था।

इतना ही नहीं, दूसरी रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार यह दूरी विरोध या वैमनस्य की वजह से नहीं थी, बल्कि O.P. Nayyar का अपना संगीत से जुड़ा विशिष्ट दृष्टिकोण था, जिसमें वे लता जी की स्वर शैली को अपनी धुनों के अनुरूप नहीं मानते थे। वे यह महसूस करते थे कि उनकी धुनों में आशा भोंसले, गीता दत्त और शमशाद बेगम की आवाज़ अधिक उपयुक्त बैठती हैं ।

इनके अतिरिक्त, कुछ कहानियों में बताया गया है कि विवाद के बाद O.P. Nayyar ने खुलकर कहा कि “लता मंगेशकर फिर मेरे साथ काम नहीं करेंगी”, जबकि लता जी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे स्टूडियो नहीं पहुँच सकती थीं, क्योंकि उस समय उनका कोई और रिकॉर्डिंग शेड्यूल था।

अपने व्यक्तिगत और पेशेवर दृष्टिकोण में दृढ़ रहे O.P. Nayyar ने आशा भोंसले के साथ एक लंबा और सुनहरा सफर तय किया, जिसमें उन्होंने कई अनगिनत मीठे और चंचल गीतों का निर्माण किया। ये गाने आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं: जैसे “Aaiye Meherbaan”, “Yeh Hai Reshmi Zulfon Ka Andhera”, “Aao Huzoor Tumko”, और “Tumsa Nahin Dekha” आदि ।

इस पूरे विवाद ने इस बात की झलक दिखाई कि संगीत की दुनिया में व्यक्तिगत पसंद, छोटी-सी असहजता, और पेशेवर रचनात्मकता कभी-कभी बड़े फैसलों की वजह बन जाती है। यह कहानी केवल एक संगीत विवाद नहीं, बल्कि संगीत के प्रति दृढ़ संकल्प और अपनी विशिष्ट पहचान पर अडिग रहने का प्रमाण है।