बॉलीवुड के डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने हाल ही में एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने लता मंगेशकर की समर्पण और मेहनत की भावना को एक नए अंदाज़ में पेश किया। उन्होंने बताया कि जब ‘रंग दे बसंती’ के लिए ए.आर. रहमान ने “लुका छुपी” गीत तैयार किया था, तब लता जी ने एक प्रेरणादायक फैसला लिया – वे इसकी रिकॉर्डिंग चेन्नई जाकर करना चाहती थीं। मेहरा उनको मुंबई में रिकॉर्ड कराने की बात कर रहे थे, लेकिन लता जी ने विनम्रता से कह दिया, “उनके (रहमान के) माहौल में ही रिकॉर्ड करना ठीक लगेगा।”
वह चेन्नई में तीन दिन पहले ही पहुँच गईं और होटल में आराम करने के बजाय सीधे स्टूडियो चली गईं। रहमान ने उनका स्वागत किया और उन्होंने गाना सुनकर रिकॉर्डिंग से पहले अभ्यास मांग लिया। एक कैसेट (Walkman पर चलने वाले) पर गाना सुनकर प्रैक्टिस करने की मांग उनके समय-सम्मान और काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाती है।
रिकॉर्डिंग के दिन, तीन लोग अंदाज़ा लगा रहे थे कि शायद वे बैठकर गा लें। लेकिनॆ लता जी ने तुरंत कहा—“माइक्रोफ़ोन नीचे क्यूँ रखा गया है? इसे ऊपर लाओ।” उन्होंने पूरी रिकॉर्डिंग खड़े रहकर ही की और पूरे 8 से 10 घंटे खड़ी रहीं, जब तक गीत पूरी तरह से रिकॉर्ड नहीं हुआ। यह उनके संगीत के प्रति ईमानदारी और डिसिप्लिन की मिसाल था।
यह कहानी सिर्फ एक गीत की रिकॉर्डिंग से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे लता जी जैसी महान कलाकार हमेशा गुणवत्ता और भावनाओं को प्राथमिकता देती थीं। खड़े होकर गाने से उनकी आवाज़ में शक्ति, भावनात्मकता और दृढ़ता बनी रहती थी।